“अयोध्या: राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों की चोरी, चार कर्मी संदिग्ध”
Ayodhya: Theft of crores from Ram Mandir donation box
Ayodhya: Theft of crores from Ram Mandir donation box, राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से दानपात्र में डाली गई धनराशि में गबन का प्रकरण सामने आया है। बताया जा रहा कि धनराशि की गिनती में लगे कुछ कर्मियों ने ही हेरफेर किया है। ऐसे लगभग चार संदिग्ध कर्मियों को चिह्नित कर पूछताछ भी की गई। चर्चा है कि कुछ रुपये बरामद भी हुए हैं।
बीते तीन दिन से यह प्रकरण चर्चा में है। ट्रस्ट, सुरक्षा व एजेंसियों से जुड़े कर्मी भी दबी जुबान से स्वीकार कर रहे, परंतु आधिकारिक रूप से कोई कुछ भी बोलने से कतरा रहा है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदारों ने भी चुप्पी साध रखी है।
रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर ट्वीट कर इस प्रकरण को उजागर किया है। उन्होंने सरकारी की चुप्पी को संदिग्ध बताते हुए न्यायालय से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया। उनके ट्वीट के बाद स्थानीय सपा नेता भी मुखर हो गए हैं।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरों के सामने और पूरे दर्शन मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर लगभग चार दर्जन दानपात्र रखवाए हैं। रामलला व अन्य देवों का दर्शन करके श्रद्धालु इन दान पेटिकाओं में इच्छानुसार नकद धनराशि अर्पित करते हैं। चढ़ावे की इस धनराशि काे प्रतिदिन एकत्रित करा कर ट्रस्ट की ओर से गिनती कराई जाती है। इसके लिए ट्रस्ट ने स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) को अधिकृत किया है।
एसबीआई ने धनराशि की गणना में एक निजी एजेंसी को लगाया है। इसकी देखरेख में ट्रस्ट व एसबीआइ के कर्मी भी संलग्न रहते हैं। सूत्रों का कहना है कि गणना के दौरान धीरे-धीरे धनराशि में हेरफेर की जाती रही। यह मामला शुक्रवार को सीसी कैमरे की निगरानी से पकड़ में आया। यह कैमरा छिपा कर लगाया गया है।
सूत्र बताते हैं कि चार संदिग्ध कर्मियों को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ भी की और उनकी निशानदेही पर यात्री सुविधा केंद्र से कुछ रकम बरामद भी की। मामला संज्ञान में आने के बाद ट्रस्ट के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने तक की चेतावनी दी, परंतु किसी के दबाव पर बाद में वह भी चुप हो गए। चर्चाओं के अनुसार रविवार को एक ट्रस्टी ने एक वरिष्ठ कर्मी को निकाल भी दिया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
गबन मामले में मंदिर प्रबंधन के साथ ही एसबीआइ के कर्मियों की भी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही। यह अलग बात है कि इस बारे में पूछने पर सभी जिम्मेदार अनभिज्ञता जता रहे हैं।
इस संबंध में ट्रस्ट महासचिव चंपतराय से संपर्क नहीं हो सका। राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव ने कहाकि ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। रामजन्मभूमि परिसर के एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे ने इसे महज अफवाह बताते हुए कहा, ऐसे किसी मामले की जानकारी उन्हें नहीं है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का ट्वीट
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट किया है, ‘समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वत: संज्ञान लेने की मांग है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।’
ट्रस्ट खंडन करे या मामले की जांच कराए: पवन
सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के ट्वीट को गंभीर बताते हुए कहाकि यह बड़ा दुर्भाग्य है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई धनराशि में गबन किया गया है। कहा, यदि मामला सही नहीं है तो ट्रस्ट को आगे आकर इसका खंडन करना चाहिए या अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सफाई देनी चाहिए।
पवन ने इसे गंभीर प्रकरण बताते हुए कहा, जबसे मंदिर के लिए चढ़ावा आ रहा है, तबसे पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जानी चाहिए और ऐसा करने वालों को बेनकाब किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट की सफाई, कहा-चल रही आंतरिक ऑडिट
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने दानपात्र की धनराशि में गड़बड़ी के प्रकरण पर बयान जारी करते हुए कहा है, ‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक आडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं। आडिट कार्य कई दिन तक चलता है। वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है।’
एक कर्मी के खाते से पांच लाख कराया गया रिकवर
दानपात्र की धनराशि की गड़बड़ी से जुड़े एक कर्मी के खाते से ट्रस्ट ने पांच लाख रुपये भी रिकवर करा लिया है। सूत्रों ने बताया कि गणना से जुड़े कर्मी अविनाश शुक्ल से पुलिस ने पूछताछ की तो उसने अपने खाते में धनराशि होने की जानकारी दी।
इसके बाद उसे पुलिस टीम संबंधित बैंक लेकर गई और उसके खाते में रहे गबन के पांच लाख रुपये ट्रस्ट के खाते में वापस कराए हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि ट्रस्ट की प्रारंभिक जांच में गणना से जुड़े चार-पांच कर्मियों का एक गुट इसमें सम्मिलित रहा है। यही गुट लगातार चोरी से दानपात्र के रुपयों की हेराफेरी कर रहा था।